पीएसजी ने मैटवे सफोनोव की चार बचावों से फ्लामेंगो को हराकर इंटरकॉन्टिनेंटल कप जीता
जब पेरिस सेंट-जर्मेन ने फ्लामेंगो को 2-1 से पेनल्टी शूटआउट में हराया, तो फुटबॉल का इतिहास बदल गया। यह निर्णायक जीत अहमद बिन अली स्टेडियम, अल रय्यान, कतर में 17 दिसंबर, 2025 को आयोजित 2025 फीफा इंटरकॉन्टिनेंटल कपअल रय्यान के फाइनल में हुई। 120 मिनट के खेल के बाद 1-1 की बराबरी के बाद, मैटवे सफोनोव ने चार लगातार पेनल्टी बचाकर फ्रांसीसी क्लब को उसका पहला इंटरकॉन्टिनेंटल कप ट्रॉफी दिलाया। यह जीत पीएसजी के लिए 2025 में छठा खिताब था — एक ऐतिहासिक सेक्सटपल।
एक अद्वितीय सेक्सटपल का अंत
पीएसजी ने 2025 में ट्रॉफी डुम्प कर दी। ट्रॉफी डे शैम्पियन, लीग 1, कूप डी फ्रांस, यूईएफए चैम्पियंस लीग और यूईएफए सुपर कप के बाद, यह अंतिम ट्रॉफी ने उन्हें फ्रांसीसी फुटबॉल के इतिहास में सबसे सफल वर्ष दिलाया। यह क्लब के लिए 50वां जीत भी था — जो कभी नहीं हुआ। अब उनके कुल ट्रॉफी 57 हो गए। यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि एक संस्कृति का निर्माण था।
सफोनोव: रूसी गोलकीपर ने बनाया इतिहास
जब बारिश की बूंदें भी नहीं गिर रही थीं, तब अहमद बिन अली स्टेडियम में एक रूसी गोलकीपर ने अपनी उंगलियों से इतिहास लिख दिया। मैटवे सफोनोव (26) ने पेनल्टी शूटआउट में चार बार गोल को रोका। पहले ब्राजिलियाई डिफेंडर एंड्रियन, फिर अर्जेंटीना के मिडफील्डर डी अरास्केटा, फिर ब्राजिल के युवा स्ट्राइकर एंड्रियन और अंत में विन्सेंट ने शूट किया — हर बार सफोनोव ने गेंद को निकाल दिया। जब अंतिम शूट रोका गया, तो उसके साथी उसे हवा में उछाल रहे थे। बीइन स्पोर्ट्स ने कहा, 'सफोनोव ने चार बचावों से एक टीम को ट्रॉफी दे दी। यह दुनिया भर में किसी गोलकीपर के लिए सबसे बड़ा दिन था।'
मार्किन्होस का नेतृत्व और जॉर्जिन्हो की बराबरी
मार्किन्होस (31), जिन्होंने इसी मैच में पीएसजी के लिए 500वां मैच खेला, टीम का कप्तान थे। उन्होंने अपने बायें कान के पास एक बार फिर से अपने नाम को ट्रॉफी पर खुदा। लेकिन फ्लामेंगो के लिए जॉर्जिन्हो (39) ने 62वें मिनट में एक बेहद शांत और ताकतवर पेनल्टी लगाकर मैच को बचा लिया। वार के बाद वीएआर ने पुष्टि की — मार्किन्होस ने डी अरास्केटा को बॉक्स के अंदर गिरा दिया। रेफरी इस्माइल एल्फाथ ने पेनल्टी दिया। जॉर्जिन्हो ने इसे बारीकी से डाल दिया। यह गोल ने फ्लामेंगो को एक नई जिंदगी दी।
फ्लामेंगो की यादें: 1981 के बाद पहली बार
ब्राजील के इस क्लब के लिए यह फाइनल एक सपना था। 1981 के बाद यह पहली बार था जब फ्लामेंगो इंटरकॉन्टिनेंटल कप के फाइनल में पहुंचा। उनके गाने, उनके रंग, उनके फैंस — सब कुछ एक बार फिर जीवित हो गया। लेकिन जब चौथी पेनल्टी बचाई गई, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने 2025 में कोपा लिबर्टेडोरेस जीता था, लेकिन अंतिम दौर में उनकी टीम टूट गई।
ओसमाने डेम्बेले का अनुपस्थिति का रहस्य
पीएसजी के फैंस ने एक सवाल पूछा: ओसमाने डेम्बेले कहां हैं? 28 साल के फ्रेंच स्ट्राइकर ने फाइनल में शुरुआत नहीं की। कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया। कुछ समाचारों ने कहा कि वह थके हुए थे, कुछ ने कहा कि लुईस एनरिके ने उनकी जगह नए युवा खिलाड़ी को दिया। लेकिन असली बात यह है — जब टीम इतनी मजबूत हो जाती है, तो एक खिलाड़ी की अनुपस्थिति भी टीम के लिए बड़ी बात नहीं बन जाती।
इंटरकॉन्टिनेंटल कप का अर्थ: क्यों यह ट्रॉफी इतनी खास है?
यह टूर्नामेंट केवल एक और गेम नहीं है। यह छह महाद्वीपों के चैंपियनों की बैठक है। पीएसजी यूरोप के चैंपियन थे, फ्लामेंगो दक्षिण अमेरिका के। यह एक ऐसा मुकाबला है जहां यूरोप और दक्षिण अमेरिका की फुटबॉल विरासत आमने-सामने होती है। 2025 का यह फाइनल दुनिया के सबसे बड़े क्लब फुटबॉल टूर्नामेंट में से एक बन गया।
अगला कदम: पीएसजी का नया लक्ष्य
अब पीएसजी का लक्ष्य 2026 है। क्या वे एक साल में सात ट्रॉफी जीत सकते हैं? क्या वे यूईएफए चैम्पियंस लीग की रक्षा कर सकते हैं? और क्या मैटवे सफोनोव अगले साल भी इतना अद्भुत रहेगा? लुईस एनरिके ने कहा, 'हम जीते हैं, लेकिन हम अभी भी अपने लक्ष्य के बहुत करीब नहीं हैं।' यह बयान उनकी भावना को दर्शाता है — जीत के बाद भी, वे भूखे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीएसजी ने 2025 में कितने खिताब जीते?
पीएसजी ने 2025 में छह खिताब जीते: ट्रॉफी डे शैम्पियन, लीग 1, कूप डी फ्रांस, यूईएफए चैम्पियंस लीग, यूईएफए सुपर कप और इंटरकॉन्टिनेंटल कप। यह क्लब के इतिहास में सबसे अधिक ट्रॉफी है। इस साल उन्होंने 50 मैच जीते, जो भी किसी फ्रांसीसी क्लब के लिए अभी तक नहीं हुआ था।
मैटवे सफोनोव के चार पेनल्टी बचाव कितने दुर्लभ हैं?
फुटबॉल के इतिहास में पेनल्टी शूटआउट में चार बचाव करने वाला गोलकीपर बहुत कम है। यह अब तक केवल तीन बार हुआ है — और इसमें से एक भी इंटरकॉन्टिनेंटल कप के फाइनल में नहीं हुआ। सफोनोव ने इसे दुनिया के सबसे बड़े क्लब टूर्नामेंट में किया, जिससे उनका नाम फीफा के इतिहास में दर्ज हो गया।
फ्लामेंगो ने पिछली बार इंटरकॉन्टिनेंटल कप कब जीता था?
फ्लामेंगो ने 1981 में ब्रिटिश क्लब लिवरपूल को हराकर अपना पहला और अब तक का एकमात्र इंटरकॉन्टिनेंटल कप जीता था। 44 साल बाद, उन्होंने फिर से फाइनल में प्रवेश किया, लेकिन पेनल्टी शूटआउट में हार गए। यह उनके लिए एक अधूरा सपना बन गया।
ओसमाने डेम्बेले क्यों नहीं खेले?
पीएसजी ने डेम्बेले की अनुपस्थिति का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया। खबरों के अनुसार, वह थके हुए थे या फिर टीम को बेहतर टैक्टिकल ऑप्शन चाहिए था। उनकी जगह फिलिपे कोरिन्हो ने खेली, जिन्होंने डिफेंस में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। इस फाइनल में डेम्बेले की अनुपस्थिति ने टीम के प्रदर्शन को प्रभावित नहीं किया।
इंटरकॉन्टिनेंटल कप क्या है और कैसे चुने जाते हैं टीम?
इंटरकॉन्टिनेंटल कप फीफा द्वारा आयोजित एक टूर्नामेंट है, जिसमें छह महाद्वीपों के चैंपियन क्लब शामिल होते हैं। पीएसजी यूरोप के चैंपियन (यूईएफए चैम्पियंस लीग विजेता) थे, और फ्लामेंगो दक्षिण अमेरिका के चैंपियन (कोपा लिबर्टेडोरेस विजेता) थे। यह टूर्नामेंट दुनिया के सबसे बड़े क्लब टीमों के बीच एक वास्तविक चैंपियनशिप बनाता है।
पीएसजी का अगला मुकाबला कब है?
पीएसजी का अगला आधिकारिक मैच 2026 की शुरुआत में ट्रॉफी डे शैम्पियन में होगा, जहां वे लीग 1 के दूसरे स्थान पर रहने वाले क्लब के खिलाफ खेलेंगे। लेकिन अभी उनका ध्यान फीफा क्लब वर्ल्ड कप की तैयारी पर है, जो दिसंबर 2025 में सऊदी अरब में होगा।
bhargav moparthi
मैं भारतीय समाचारों का एक अनुभवी लेखक और विश्लेषक हूं। मैं उदयपुर में रहता हूँ और वर्तमान में एक प्रसिद्ध समाचार पत्रिका के लिए कार्यरत हूं। मेरा विशेष क्षेत्र राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे हैं। मैं समाचार विश्लेषण प्रदान करने में माहिर हूँ और मुझे नई चुनौतियों का सामना करने में आनंद आता है।
17 टिप्पणि
एक टिप्पणी लिखें उत्तर रद्द
हमारे बारे में
दैनिक दीया एक प्रमुख हिन्दी समाचार वेबसाइट है जो भारतीय संदर्भ में ताजा और विश्वसनीय समाचार प्रदान करती है। यह वेबसाइट दैनिक घटनाओं, राष्ट्रीय मुद्दों, महत्वपूर्ण समाचारों के साथ-साथ मनोरंजन, खेल और व्यापार से संबंधित खबरें भी कवर करती है। हमारा उद्देश्य आपको प्रमाणित और त्वरित समाचार पहुँचाना है। दैनिक दीया आपके लिए दिनभर की खबरों को सरल और सटीक बनाती है। इस वेबसाइट के माध्यम से, हम भारत की जनता को सूचित रखने की कोशिश करते हैं।
सफोनोव ने जो किया, वो बस एक गोलकीपर का काम नहीं था। वो तो एक देवता बन गया।
मैं तो बस इतना कहूंगा कि जब एक टीम इतनी बड़ी जीत दर्ज कर लेती है, तो उसका हर एक खिलाड़ी उसका हिस्सा होता है। सफोनोव ने चार पेनल्टी रोकीं, लेकिन मार्किन्होस की लीडरशिप, जॉर्जिन्हो की शांत आत्मा, फिलिपे कोरिन्हो की डिफेंस - सबने मिलकर ये जीत बनाई। ये सिर्फ एक मैच नहीं, ये तो एक संगीत था, जहां हर तार अपनी जगह पर था। पीएसजी ने एक साल में 50 मैच जीते - ये तो अब एक संस्कृति बन गई है। लुईस एनरिके का कहना है कि वो अभी भी भूखे हैं - और मुझे लगता है, ये भूख ही उन्हें इतना बड़ा बना रही है।
इंटरकॉन्टिनेंटल कप का मतलब अब सिर्फ जीत-हार नहीं, बल्कि एक संस्कृति का संगम है। फ्लामेंगो के गाने, पीएसजी की आधुनिकता - दो दुनियाएं एक घड़ी में टकराईं। और जब सफोनोव ने चौथी पेनल्टी रोकी, तो मुझे लगा, जैसे रूस का दिल ब्राजील के लिए बंद हो गया। ये फुटबॉल नहीं, ये तो एक नाटक है, जहां हर शूट एक कविता है।
सब ये कह रहे हैं कि सफोनोव एक देवता है... लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि ये सब एक बड़ा धोखा है? पीएसजी के पास 300 करोड़ डॉलर हैं, उन्होंने सब कुछ खरीद लिया - खिलाड़ी, ट्रेनर, रेफरी, और अब इतिहास भी। डेम्बेले क्यों नहीं खेले? क्योंकि वो जानता था - ये मैच पहले से तय था। फीफा का ये टूर्नामेंट? बस एक ब्रांडिंग गेम है। जब तक आपके पास पैसा है, तब तक आप इतिहास बना सकते हैं।
सफोनोव के चार बचाव एक ऐतिहासिक घटना हैं, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी बात है - टीमवर्क। एक गोलकीपर अकेला कुछ नहीं कर सकता। मार्किन्होस का नेतृत्व, जॉर्जिन्हो की शांत शक्ति, यहां तक कि डेम्बेले की अनुपस्थिति भी एक टैक्टिकल चॉइस थी। ये जीत एक टीम की है, न कि एक व्यक्ति की। और ये बात हमें याद दिलाती है कि वास्तविक जीत तब होती है जब सब कुछ सही जगह पर हो।
इंटरकॉन्टिनेंटल कप का असली मतलब ये है कि दुनिया के दो सबसे अलग फुटबॉल स्कूल आमने-सामने होते हैं - यूरोप की संरचना और दक्षिण अमेरिका की जान। पीएसजी का फुटबॉल एक मशीन है, फ्लामेंगो का एक दिल। और जब एक मशीन एक दिल को हरा देती है, तो ये अंतर और भी गहरा हो जाता है। सफोनोव ने बस उस दिल को थोड़ा और धीरे से दिल में रख दिया।
फ्लामेंगो को फाइनल में जाने दो... पर जब एक रूसी गोलकीपर ने चार पेनल्टी रोकीं, तो ये फुटबॉल नहीं, ये राष्ट्रीय अपमान है! ब्राजील का फुटबॉल अब बस एक नाटक है - और ये टूर्नामेंट? फीफा का एक बड़ा फेक है! यूरोप के पास हर चीज है - पैसा, पावर, प्रेस! इसकी तुलना में दक्षिण अमेरिका का फुटबॉल बस एक भावना है! और भावना जीत नहीं सकती, जब तक आपके पास एक रूसी देवता नहीं होता!
क्या सफोनोव के चार पेनल्टी बचाव कभी हुए थे? मैंने देखा तो बस एक बार - 2018 वर्ल्ड कप में कोर्टोइस के पास। लेकिन इंटरकॉन्टिनेंटल कप में? नहीं। ये असली हिस्ट्री है।
भाई, ये जीत तो बस शुरुआत है। पीएसजी अब एक इम्पीरियल टीम बन गया है। सफोनोव की उंगलियां अब दुनिया की नजरों में हैं। और जब तुम इतना बड़ा कर देते हो, तो अगला लक्ष्य तो सिर्फ और सिर्फ और और जीत होती है। जब तक लुईस एनरिके के पास भूख है, तब तक ये ट्रॉफी बस एक नंबर है।
हर जीत के पीछे एक अधूरा सपना छिपा होता है। फ्लामेंगो के लिए 1981 का वो जीत, अब 2025 का ये हार - ये दोनों एक ही धागे के दो अंत हैं। और सफोनोव? वो तो एक विश्वास बन गया - विश्वास कि एक इंसान भी एक पूरी टीम को बचा सकता है।
इस जीत के पीछे एक गहरी टैक्टिकल फिलॉसफी छिपी है। पीएसजी के पास एक डिजिटल टीम मैनेजमेंट सिस्टम है - हर खिलाड़ी का डेटा, हर शूट का एनालिसिस, हर गोलकीपर का रिफ्लेक्स पैटर्न। सफोनोव के चार बचाव बस एक आउटपुट थे - एक आल्गोरिदम का अंतिम फल। और जब आपके पास इतना डेटा है, तो भाग्य भी एक फंक्शन बन जाता है।
फ्लामेंगो के फैंस ने जो देखा, वो कोई खेल नहीं था - वो तो एक आत्मा का अंत था। लेकिन अगर आप देखें, तो पीएसजी की जीत भी एक आत्मा की जीत नहीं, बल्कि एक व्यवस्था की जीत है। दोनों टीमें अपने-अपने रास्ते से जीत रही हैं। और शायद यही फुटबॉल का सच है - जहां भावना और व्यवस्था एक साथ खेलती हैं।
मैटवे ने जो किया, वो बस गोलकीपर का काम था... पर देखो अब उसका नाम लोग दुनिया भर में बोल रहे हैं। बस एक दिन का जादू।
ओसमाने डेम्बेले नहीं खेले? शायद वो जानते थे कि ये मैच पहले से ही बाहर निकाल दिया गया है - जैसे अमेरिकी चुनाव। अब ये फुटबॉल नहीं, ये बॉलवुड है।
सफोनोव ने चार बचाव किए। बस इतना ही।
ये जीत एक नया युग शुरू कर रही है - जहां एक गोलकीपर की उंगलियां दुनिया के इतिहास को बदल देती हैं, जहां एक टीम एक साल में 50 मैच जीतती है, जहां एक खिलाड़ी की अनुपस्थिति कोई बात नहीं होती, जहां एक टूर्नामेंट बन जाता है एक धार्मिक अनुष्ठान - और फिर भी, लोग कहते हैं, ये बस एक खेल है।
महान टीम की विशेषता यह है कि वह अपने सबसे बड़े खिलाड़ी की अनुपस्थिति में भी अपनी शक्ति बनाए रखती है। पीएसजी ने यह साबित कर दिया।