आपकी जमीन पर जब सरकार या किसी प्रोजेक्ट के लिए नोटिस आता है तो पहला सवाल होता है — अब क्या? यह पेज आप के लिए सीधे और उपयोगी जानकारी देता है: नोटिफिकेशन कैसे देखें, किस तरह मुआवजा तय होता है, और अगर आप असहमत हैं तो क्या कदम उठाने चाहिए।
सबसे पहले नोटिफिकेशन (सूचना) की कॉपी संभालें। आधिकारिक गज़ेट या कलेक्टर कार्यालय की नोटिफिकेशन में तारीखें, सर्वे नंबर और किन योजनाओं के लिए जमीन ली जा रही है, ये सब लिख होता है। यह डॉक्यूमेंट आपके विरोध या मुआवजा दावे की नींव है।
प्रक्रिया आमतौर पर चार हिस्सों में होती है: (1) सूचना जारी होना, (2) आपत्ति/विचार का मौका, (3) मुआवजे का निर्धारण और (4) कब्ज़ा/हस्तांतरण। आपत्ति के लिए दिए गए समय में लिखित में अपनी दलीलें दें—यह मौका मत छोड़िए।
मुआवजा तय करते समय कई बातें देखी जाती हैं: जमीन का बाजार मूल्य, सरकारी दरें (circle rate), जमीन पर लगी फसलों या संरचनाओं का मूल्य, और प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास व पुनर्स्थापन। अक्सर दफ्तर के द्वारा तय रकम कम लगती है—इसलिए आंकड़े स्वयं जुटाएं और जरूरत पड़े तो वकील या लोकनायक संस्थान से सलाह लें।
1) नोटिफिकेशन और सर्वे नंबर की रिपोर्ट कॉपी रखें और क्षेत्रीय कलेक्टर/तालुका दफ्तर में पंजीकृत कराएं।
2) अपने पास मौजूद दस्तावेज (खसरा-खतौनी, अंकित नक्शे, विक्रय दस्तावेज, पहचान-पत्र) इकट्ठा करें। फोटो और भूमिकरण (mutation) भी जरूरी है।
3) मुआवजा आंकलन के लिए स्थानीय रियल एस्टेट रेट और पिछले बिक्री रिकॉर्ड देखें। जब सरकारी ऑफर आए तो लिखित में मुआवजे का ब्रेकअप मांगें।
4) अगर आपत्ति है तो निर्धारित समय के अंदर लिखित आपत्ति दर्ज करें। आप स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामसभा या कानूनी सलाह का उपयोग कर सकते हैं।
5) पुनर्वास से जुड़ी सुविधाओं (रिहैब पैकेज, रोजगार, आवास) की शर्तें समझें और लिखित में मांगें—मुहैया कराई गई सुविधाओं का रिकॉर्ड रखें।
6) यदि सरकारी फैसला अनुकूल नहीं है, तो आपने नोटिफिकेशन के समय पर आपत्ति की हो तो अगला कदम कोर्ट या विशेष अधिकारिक अधिकारियों तक अपील करना है।
आम तौर पर लोगों को सबसे ज्यादा उलझन मुआवजा और पुनर्वास पर होती है। इसलिए शुरुआत से ही रिकॉर्ड रखें, सरकारी फाइलों की कॉपी मांगते रहें और इलाके के पूर्व लेन-देन का डेटा संभाल कर रखें।
अगर आप चाहें तो स्थानीय NGO या न्याइ सलाहकार से संपर्क कर सकते हैं—वे दस्तावेज तैयार करने और सुनवाई में मदद देते हैं।
दैनिक दीया पर हम समय-समय पर भूमि अधिग्रहण से जुड़ी खबरें और उपयोगी लेख प्रकाशित करते हैं ताकि आप अपडेट रहें और अपने हक के लिए सही कदम उठा सकें।
झारखंड हाई कोर्ट ने 28 जून को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भूमिअधिग्रहण मामले में जमानत दी। प्रवर्तन निदेशालय ने जनवरी में उन्हें गिरफ्तार किया था। इस मामले में सोरेन ने गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताते हुए जमानत याचिका दाखिल की थी। एजेंसी ने सोरेन पर धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।