क्या आप जानना चाहते हैं कि इज़राइल की सेना के फैसले पीछे कौन सोचता है? गादी आइजनकोट नाम अक्सर इसलिए आता है क्योंकि वे 2015-2019 के बीच इज़राइल के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ रहे। उनके फैसले और नीतियाँ न सिर्फ इज़राइल की सुरक्षा पर असर डालती हैं, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की राजनीति पर भी छाप छोड़ती हैं।
मैं सरल भाषा में बताता/बताती हूँ कि उनकी प्राथमिकताएँ क्या रहीं और आप किन खबरों पर ध्यान दें।
गादी आइजनकोट पेशे से करियर आर्मी ऑफिसर हैं। उन्होंने नॉर्दर्न कमांड जैसे संवेदनशील पदों पर काम किया। चीफ़ ऑफ़ स्टाफ के रूप में उनका रुख आमतौर पर सतर्क और टेक-फोकस्ड रहा। इंटेलिजेंस और तकनीक को उन्होंने सैनिक क्षमता बढ़ाने के लिए अहम माना।
उनकी प्राथमिक चीज़ें थीं: सीमाओं पर तैयारियाँ, आतंकवाद और हथियारों की आपूर्ति पर नजर, और सेना के आधुनिककरण के कदम। इसके साथ ही उन्होंने रिजर्व फोर्स और प्रशिक्षण पर भी ज़ोर दिया ताकि छोटी-से-छोटी चुनौती का जवाब तेज़ी से दिया जा सके।
आप समझना चाहेंगे कि उनकी नीतियाँ रोज़मर्रा की खबरों में कैसे दिखती हैं। मिसाल के तौर पर, जब कोई सीमा पर तनाव बढ़ता है तो उनकी रणनीति के संकेत मिलते हैं — कूटनीति के साथ सैन्य तैयारियों का संतुलन।
उनके कार्यकाल में टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ा। इसका मतलब: रॉकेट, ड्रोन और साइबर खतरों का मुकाबला अधिक निगरानी और तेज जवाब के जरिए किया जाना। यही वजह है कि मिडिल-ईस्ट में होने वाली मेल-जोखिम की घटनाओं में उनके विचार अक्सर उद्धरण बनते हैं।
विरोध और आलोचना भी रही। कुछ समय में नागरिक नुकसान और सैन्य ऑपरेशन्स के बारे में बहस तेज हुई। ये बहसें इसलिए अहम हैं क्योंकि वे नीति और मानवाधिकार के संतुलन को चुनौती देती हैं।
अगर आप गहरी समझ चाहें तो इन बातों पर ध्यान दें: उनकी सार्वजनिक टिप्पणियाँ, सेना के आधिकारिक बयान, और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के रिपोर्ट। इससे आपको पता चलेगा कि किस तरह उनकी सोच नीति में बदलती है।
खबरों की खोज करने का आसान तरीका: उनके नाम के साथ “नीति”, “इज़राइल रक्षा”, “नॉर्थर्न कमांड” या “चीफ ऑफ़ स्टाफ” जैसे शब्द जोड़ें। इससे आपको बायोग्राफी, विश्लेषण और ताज़ा घटनाओं के लेख मिलेंगे।
चाहते हैं कि हम इस टैग से जुड़ी ताज़ा खबरें आपके लिए दिखाएँ? नीचे दिए गए लेखों और विश्लेषणों पर नजर रखें। हम ताज़ा अपडेट, बैकग्राउंड और विशेषज्ञ टिप्पणियाँ लाते रहते हैं ताकि आप जल्दी समझ सकें कि कोई घटना क्यों हुई और आने वाले दिनों में किस तरह बदल सकती है।
अगर आपके पास कोई ख़ास सवाल है—उदाहरण के लिए उनकी किसी रणनीति का असर भारत-इज़राइल संबंधों पर—तो पूछिए। मैं सीधे और सटीक जवाब दूँगा/देगी।
बेनी गैंट्ज़, पूर्व इज़राइली सैन्य नेता, और गादी आइजनकोट ने इज़राइल के युद्ध कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है। गैंट्ज़ ने 37 साल इज़राइल रक्षा बलों को समर्पित किए। उन्होंने बिन्यामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में संकट के समय अपनी भूमिका निभाई। 2020 में COVID-19 महामारी के दौरान गैंट्ज़ ने एकता सरकार में शामिल होने का निर्णय लिया था।