महिला दिवस 2025: 'तेजी से कार्य करना' के साथ भारत में महिलाओं के लिए नया आह्वान
bhargav moparthi
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मैं भारतीय समाचारों का एक अनुभवी लेखक और विश्लेषक हूं। मैं उदयपुर में रहता हूँ और वर्तमान में एक प्रसिद्ध समाचार पत्रिका के लिए कार्यरत हूं। मेरा विशेष क्षेत्र राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे हैं। मैं समाचार विश्लेषण प्रदान करने में माहिर हूँ और मुझे नई चुनौतियों का सामना करने में आनंद आता है।

18 टिप्पणि

  1. Narayana Murthy Dasara Narayana Murthy Dasara
    नवंबर 22, 2025 AT 04:44 पूर्वाह्न

    अच्छा लगा ये पोस्ट। मैंने अपने गाँव के स्कूल में एक लड़की को पढ़ाया था, जिसने अभी IIT में एडमिशन ले लिया। बस एक बार उसे सही दिशा दे दो, बाकी वो खुद आगे बढ़ जाती है।

  2. lakshmi shyam lakshmi shyam
    नवंबर 23, 2025 AT 22:45 अपराह्न

    अरे भाई, ये सब बकवास है। सिर्फ भाषण देकर क्या होगा? जब तक घर में बेटी को चाय पीने के बाद बर्तन नहीं धोने देंगे, तब तक ये सब नाटक है।

  3. Sabir Malik Sabir Malik
    नवंबर 25, 2025 AT 02:27 पूर्वाह्न

    मैं तो बहुत उत्साहित हूँ कि आजकल बच्चे भी इतनी गहराई से सोच रहे हैं। मेरा बेटा तो अपने दोस्त को बोलता है कि लड़कियों को ऑफिस में अधिक जिम्मेदारी देनी चाहिए। और जब मैं उससे पूछता हूँ कि तू ऐसा क्यों सोचता है, तो वो कहता है कि उसकी माँ भी बहुत तेज हैं लेकिन घर के काम में फंसी हुई हैं। ये बदलाव छोटे-छोटे घरों से शुरू हो रहा है। मैंने अपने दोस्त को भी बताया कि उसकी बहन को अपनी बात सुननी चाहिए, और अब वो उसके साथ प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। ये छोटे कदम ही बड़े बदलाव लाते हैं।

  4. Debsmita Santra Debsmita Santra
    नवंबर 26, 2025 AT 02:10 पूर्वाह्न

    सशक्तिकरण का अर्थ बस शिक्षा और रोजगार नहीं है यार ये एक सामाजिक कॉग्निटिव रिफ्रेमिंग का प्रक्रिया है जिसमें लैंगिक असमानता के बेसलाइन नॉर्म्स को डिस्कन्स्ट्रक्ट करना पड़ता है और उसके बाद ही स्ट्रक्चरल इंटरवेंशन्स वर्क करते हैं जैसे कि फ्लेक्सिबल वर्किंग मॉडल्स और एक्सेस टू सेफ स्पेस और फिर इनके साथ कंपनी के डीवर्सिटी पॉलिसीज का इंप्लीमेंटेशन जो अक्सर नॉन-कॉम्प्लायंट रहता है

  5. Vasudha Kamra Vasudha Kamra
    नवंबर 27, 2025 AT 06:20 पूर्वाह्न

    मैंने अपने ऑफिस में एक नया प्रोग्राम शुरू किया है जिसमें महिलाओं के लिए मेंटरशिप सेशन होते हैं। अब तक 12 लड़कियाँ इसमें शामिल हो चुकी हैं और तीन ने अपने टीम लीडर के पद पर भी लिया है। ये छोटा कदम है, लेकिन असर बहुत बड़ा है।

  6. Abhinav Rawat Abhinav Rawat
    नवंबर 29, 2025 AT 01:04 पूर्वाह्न

    इस सब के पीछे एक बड़ा सवाल है कि क्या हम वाकई बदल रहे हैं या बस एक नया नारा बना रहे हैं? हर दशक में एक नया नारा आता है। अब ये 'Accelerate Action' है। पर क्या असली बदलाव हो रहा है? या बस फोटोज और स्लोगन बढ़ रहे हैं? मैं तो देख रहा हूँ कि अभी भी लड़कियों को घर से निकलने के लिए अनुमति मांगनी पड़ती है। ये बदलाव तभी होगा जब हम अपने दिमाग को बदलेंगे।

  7. Shashi Singh Shashi Singh
    नवंबर 29, 2025 AT 04:58 पूर्वाह्न

    ये सब बाहरी चित्र है! असली बात ये है कि जब भी कोई लड़की अपनी शादी के बाद नौकरी करने की बात करती है, तो उसके ससुराल वाले उसे गाली देते हैं! और ये सब चिल्लाहट तो बस दूर के शहरों के लिए है! गाँवों में तो लड़कियों को बेटी बचाओ के बजाय बेटी बेचो का नारा चल रहा है! ये सब नाटक है! असली बात ये है कि हमारी संस्कृति ने ही लड़कियों को दास बना दिया है! 😡🔥

  8. Surbhi Kanda Surbhi Kanda
    दिसंबर 1, 2025 AT 00:27 पूर्वाह्न

    महिला सशक्तिकरण के लिए एक्सेस टू एजुकेशन और एक्सेस टू सेफ स्पेस दो अलग-अलग पैरामीटर्स हैं जिन्हें सिंक्रोनाइज करना होगा। अगर लड़कियाँ बस घर से बाहर निकल पाएंगी तो शिक्षा अधूरी है। और अगर वो ऑफिस में जाएंगी लेकिन हर दिन हरासमेंट का सामना करेंगी तो वो बस एक अस्थायी फॉर्मूला है।

  9. Sandhiya Ravi Sandhiya Ravi
    दिसंबर 2, 2025 AT 07:30 पूर्वाह्न

    मैंने अपने टाउन में एक ग्रुप बनाया है जहाँ महिलाएँ अपने घरों में बैठकर अपने बच्चों के लिए पढ़ाती हैं। एक माँ ने बताया कि उसकी बेटी अब खुद को लेडर मानती है। ये बदलाव छोटा है लेकिन गहरा है।

  10. JAYESH KOTADIYA JAYESH KOTADIYA
    दिसंबर 2, 2025 AT 21:47 अपराह्न

    भाई ये सब बकवास है। हमारे देश में तो लड़कियाँ खुद ही घर रहना चाहती हैं। ऑफिस में जाने की जरूरत ही नहीं। और वेतन का मामला? अगर लड़की ने बेटी को जन्म दिया तो उसे घर का काम करना ही चाहिए। ये नारे बस शहरों के लिए हैं। 😎🇮🇳

  11. Vikash Kumar Vikash Kumar
    दिसंबर 4, 2025 AT 01:35 पूर्वाह्न

    ये भाषण तो बस फेसबुक पर शेयर करने के लिए हैं। असली बदलाव कहाँ हुआ? नहीं हुआ।

  12. Siddharth Gupta Siddharth Gupta
    दिसंबर 4, 2025 AT 03:35 पूर्वाह्न

    मैंने अपने गाँव के एक लड़के को देखा जिसने अपनी बहन के लिए बस का टिकट खरीदा और उसे कॉलेज छोड़ दिया। उसने कहा - 'मैं तो बस उसके लिए एक रास्ता खोल दूँगा, बाकी वो खुद चलेगी।' ये ही असली बदलाव है। बस थोड़ा साहस चाहिए।

  13. Anoop Singh Anoop Singh
    दिसंबर 4, 2025 AT 05:26 पूर्वाह्न

    अरे भाई ये सब तो बस लोगों को दिखाने के लिए है। मैंने अपने दोस्त को देखा जिसकी बहन को शादी के बाद ऑफिस जाने से मना कर दिया गया। अब वो बस घर पर टीवी देख रही है। तो ये सब भाषण क्या कर रहे हैं? बस फेक न्यूज़ बना रहे हैं।

  14. Omkar Salunkhe Omkar Salunkhe
    दिसंबर 5, 2025 AT 16:16 अपराह्न

    ये सब गलत है महिलाएं असल में ज्यादा शक्तिशाली नहीं हैं वो बस ज्यादा भावुक हैं और इसलिए उन्हें ज्यादा समय देना पड़ता है और ये नारे बस उन्हें बहका रहे हैं

  15. raja kumar raja kumar
    दिसंबर 6, 2025 AT 18:20 अपराह्न

    मैंने अपने गाँव में एक छोटी सी लाइब्रेरी खोली है जहाँ लड़कियाँ बिना किसी डर के पढ़ सकती हैं। एक लड़की ने मुझे बताया कि अब वो डॉक्टर बनना चाहती है। ये बदलाव छोटा है, लेकिन ये असली है।

  16. Sumit Prakash Gupta Sumit Prakash Gupta
    दिसंबर 7, 2025 AT 00:24 पूर्वाह्न

    एक अच्छा प्रोग्राम शुरू किया गया है जिसमें लड़कियों को लीडरशिप ट्रेनिंग दी जा रही है और उन्हें रिसोर्सेज भी मिल रहे हैं। इसका आउटपुट अभी दिख रहा है। अगर ये नीति एक राज्य से दूसरे राज्य में एक्सटेंड हो जाए तो ये एक टर्निंग पॉइंट बन सकता है।

  17. Shikhar Narwal Shikhar Narwal
    दिसंबर 8, 2025 AT 18:53 अपराह्न

    मैंने अपने बेटे को बताया कि अगर वो कभी लड़की के साथ ऑफिस में जाए तो उसकी बात सुने। उसने आज बताया कि उसकी सहयोगी ने एक नया प्रोजेक्ट लिया है और वो उसकी हेल्प कर रहा है। बस एक बात सुन लो और बदलाव आ जाता है। 🙌

  18. Ravish Sharma Ravish Sharma
    दिसंबर 9, 2025 AT 16:55 अपराह्न

    अरे भाई, ये सब तो बस एक फैशन है। अगर आज कोई लड़की नौकरी कर रही है तो उसका मतलब ये नहीं कि वो सशक्त है - बल्कि ये है कि उसका घर बैंक लोन नहीं चुका पा रहा। ये सब नारे बस बाजार के लिए हैं।

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