हरित परिवहन: रोजमर्रा की सफर को साफ़ और किफायती बनाना

क्या आपने सोचा है कि आपकी रोज़ की छोटी-छोटी यात्राएँ मिलकर शहर की हवा और जेब दोनों पर भारी पड़ती हैं? हरित परिवहन का मतलब है कम प्रदूषण, कम ईंधन खर्च और बेहतर सार्वजनिक जगहें। यह सिर्फ बड़े बदलाव नहीं — रोज़मर्रा के आसान कदमों से भी बड़ा फर्क पड़ता है।

क्यों चाहिए हरित परिवहन?

ट्रैफिक, खराब हवा और बढ़ती ईंधन लागत हर शहर का आम मसला हैं। हरित विकल्प अपनाने से नागरियों में आवाजाही सस्ती और स्वस्थ बनती है। इलेक्ट्रिक वाहन, साफ सार्वजनिक बसें और साइकिलिंग से न केवल प्रदूषण घटता है, बल्कि शहर में आवाजाही की गति और विश्वसनीयता भी बढ़ती है।

घर और रोज़मर्रा के लिए व्यावहारिक कदम

यहां सीधे और करने योग्य उपाय दिए हैं जो आप आज से लागू कर सकते हैं:

1) छोटी दूरी के लिए कार की जगह ई-स्कूटर या साइकिल चुनें — ईंधन पर तुरंत बचत दिखेगी और पार्किंग की झंझट घटेगी।

2) जब संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का नियमित उपयोग करें। मासिक पास लें और यात्रा को आर्थिक बनाएं।

3) साझा सफर और कारपूल अपनाएं — ऑफिस के लिए 2-3 सहकर्मियों के साथ मिलकर यात्रा करें, रोजाना खर्च और सड़क जाम दोनों घटेंगे।

4) घर पर चार्जिंग को सोचा-समझा बनाएं — अगर आप EV लेते हैं तो रात में सस्ते टैरिफ में चार्ज करें। अगर सम्भव हो तो घर की छत पर सोलर पैनल लगवा कर चार्जिंग और भी किफायती बनाएं।

5) खरीदते समय पुराने खर्चों के साथ जीवनचक्र सोचें — बैटरी वारंटी, सर्विस नेटवर्क और रीसायक्लिंग विकल्प जरूर देखें।

6) छोटे शहरों और मोहल्लों में ई-रिक्शा और ई-ऑटो Last-mile के लिए सबसे व्यावहारिक हैं। ये सस्ते और कम प्रदूषण वाले विकल्प देते हैं।

7) नीतियों और सब्सिडी की जानकारी रखें — केंद्र और कई राज्य ईवी और सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं के लिए इंसेंटिव देते हैं। अपनी राज्य सरकार की वेबसाइट पर FAME और राज्य-स्तरीय स्कीम्स देखें।

अंत में, हरित परिवहन केवल तकनीक नहीं है — यह व्यवहार और शहरी डिजाइन का मुद्दा भी है। फुटपाथ, साइकिल लेन और विश्वसनीय बस सेवाएँ हों तो लोग खुद ही निजी कार पर निर्भर कम होंगे। आप एक छोटा कदम उठाएँ: अगले हफ्ते एक दिन कार छोड़कर सार्वजनिक या साइकिल से जाएँ और फर्क महसूस कीजिए।

भारतीय सेना और इंडियन आयल का हरा, टिकाऊ परिवहन समाधान के लिए सहयोग 29 मई 2024

भारतीय सेना और इंडियन आयल का हरा, टिकाऊ परिवहन समाधान के लिए सहयोग

भारतीय सेना ने इंडियन आयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के साथ हरे और टिकाऊ परिवहन समाधानों को शामिल करने के लिए सहयोग किया है। इस सहयोग के तहत, सेना को एक हाइड्रोजन ईंधन सेल बस मिली है, जो 37 यात्रियों को बैठा सकती है और 30 किलोग्राम हाइड्रोजन ईंधन के टैंक पर 250-300 किमी की प्रभावशाली माइलेज देती है।

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