क्या आप जानते हैं कि पिछले एक दशक में भारत की रिकॉर्ड गर्मी और अनियमित मानसून की घटनाएं अब आम हुई हैं? ये सब जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रहा है। यहाँ हम सरल भाषा में बताएंगे कि क्या बदल रहा है, क्यों और आप अपने स्तर पर क्या कर सकते हैं।
पृथ्वी का औसत तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है — यह ग्लोबल वार्मिंग कहलाता है। मुख्य कारण कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसे गैसें हैं, जो जीवाश्म ईंधन जलाने, वनों की कटाई और कृषि गतिविधियों से निकलती हैं। भारत में इसका असर सीधे दिखता है: अधिक गर्मी की लहरें, मानसून का असमय व्यवहार, समुद्र तल का बढ़ना और ग्लेशियरों का सिकुड़ना।
ये बदलाव सिर्फ मौसम नहीं बदलते — खेती, पानी, स्वास्थ्य और शहरों की ज़िंदगी भी प्रभावित होती है। उदाहरण के लिए, समय से पहले तेज बारिश से निचले इलाकों में बाढ़ और फसलों का नुकसान बढ़ता है; वहीं गर्मी से बिजली की मांग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याें भी बढ़ती हैं।
भारत ने नीतियों में सुधार शुरू कर दिया है — नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ाना, नेशनल क्लाइमेट पॉलिसी और राज्य स्तर पर हीट एक्शन प्लान्स बनाना। पर वास्तविक असर तभी दिखेगा जब इन योजनाओं को जमीन पर सही तरीके से लागू किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर बाढ़-प्रबंधन, तटीय सुरक्षा और कृषि में पानी बचाने वाली तकनीकें अपनाना जरूरी है।
अब सबसे जरूरी सवाल: आप क्या कर सकते हैं? छोटे बदलाव बड़े फर्क ला सकते हैं। रोजमर्रा के कुछ व्यावहारिक कदम ये हैं:
- बिजली बचाएँ: LED बल्ब, ऊर्जा-कुशल उपकरण और अनावश्यक रोशनी बंद रखें।
- यात्रा सोच-समझ कर करें: पब्लिक ट्रांसपोर्ट, साइकिल या साझा व्हीकल का चुनाव करें।
- खाना बचाएँ और लोकल खाएँ: बर्बादी कम करें; स्थानीय, मौसमी सब्ज़ियाँ और फल चुनें — ट्रांसपोर्ट पर निर्भरता घटेगी।
- पानी का स्मार्ट इस्तेमाल: ड्रिप इरिगेशन, वर्षा जल संचयन और नलों की मरम्मत पर ध्यान दें।
- पेड़ लगाएँ और खुले स्थान बचाएँ: वृक्ष तापमान घटाते हैं और बारिश को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
किसानों के लिए कुछ उपयोगी विकल्प: जल-टिकाऊ फसलें, मौसम के अनुसार बीज का चुनाव, और समय पर बीमारियों का प्रबंधन। शहरों में सूखा या बाढ़ के लिए स्थानीय योजनाओं में भाग लें — आपके मुहल्ले का तैयारी स्तर आम लोगों की सुरक्षा बढ़ाता है।
जानकारी कहाँ से लें? भारतीय मौसम विभाग (IMD), एनसीएआर और राज्य सरकारों की आधिकारिक सूचनाएँ भरोसेमंद होती हैं। चेतावनी और एडवाइजरी मिलने पर तुरंत पालन करें।
जलवायु परिवर्तन बड़े बदलाव ला रहा है, पर हर व्यक्ति के रोज़ाना के फैसले मिलकर बड़ा असर डाल सकते हैं। छोटे कदम अपनाकर आप न सिर्फ अपना खर्च घटाएंगे बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर वातावरण भी छोड़ पाएंगे।
केरल के वायनाड में हाल के भूस्खलनों में मृतकों की संख्या 100 के पार हो गई है, और कई अभी भी लापता हैं। जलवायु वैज्ञानिक डॉ. एस. सजानी ने बताया कि यह आपदा अरब सागर के गरमाने से हुई है। उन्होंने चेताया कि अगर सही कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है।