भूस्खलन: तुरंत पहचानें और सुरक्षित रहें

बारिश या भूकंपीय गतिविधि के बाद पहाड़ी इलाकों और ढालों पर भूस्खलन होने की संभावना बढ़ जाती है। क्या आप जानते हैं कि भारी बारिश के मामूली संकेत भी बड़े भूस्खलन का कारण बन सकते हैं? इस पेज पर आप को आसान, सीधी और उपयोगी जानकारी मिलेगी—क्यों होता है भूस्खलन, पहले क्या पहचानें और आए दिन घटनाओं में कैसे सुरक्षित रहें।

भूस्खलन के प्रमुख कारण और चेतावनी संकेत

भूस्खलन आमतौर पर इन वजहों से होते हैं: तेज बारिश या लगातार बरसात, ढालों पर कमजोर मिट्टी, कटाव और निर्माण कार्य, भूमिगत पानी का बढ़ना और भूकंप। चेतावनी संकेत पर ध्यान दें:

  • मिट्टी या पत्थरों का धीरे-धीरे फिसलना या कधी-कधी आवाज होना।
  • दीवारों में दरारें, बुनियादी ढांचे का ढीला होना।
  • नदी या नालों में अचानक मिट्टी का बहना और पानी का रंग बदल जाना।
  • पेड़ों का झुकना या जमीन की सतह पर ऊंच-नीच दिखना।

आपातकाल में तुरंत क्या करें — सरल कदम

यदि आपको लगता है कि भूस्खलन हो रहा है या आने वाला है तो तुरंत करें:

  • फौरन सुरक्षित ऊँची जगह की ओर जाएँ। वाहन में न रहें जो ढलान के पास खड़ा हो।
  • किसी भी संभावित मार्ग से दूर रहें, खासकर नदी किनारे और निचली बस्तियाँ।
  • अगर घर पर हैं तो गैस-पावर बंद करें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हटाएँ।
  • अपने परिवार को इकट्ठा करके पहले से तय निकासी मार्ग पर चलें।
  • रेडियो या मोबाइल पर स्थानीय अलर्ट और प्रशासन की निर्देशित जानकारी सुनें।

आपातकालीन किट में ये चीजें रखें: पानी, फर्स्ट-एड किट, टॉर्च और अतिरिक्त बैटरी, आवश्यक दवाइयां, महत्वपूर्ण कागजात की कॉपी और कुछ दिनों का खाना।

घटना के बाद सुरक्षित रहने के लिए: मिट्टी जमने तक लौटने से बचें, क्षतिग्रस्त बिजली तारों और गैस नलों से दूर रहें, और स्थानीय प्रशासन या राहत एजेंसियों के निर्देश का पालन करें।

रोकथाम के आसान उपाय: ढलान पर ड्रेनेज ठीक रखें, पेड़ लगाएँ ताकि जड़ें मिट्टी सम्हाले रखें, अतिकटाव वाले कामों को रोकें और स्थानीय जमीन-स्थिति की निगरानी करें। समुदाय स्तर पर चेतावनी प्रणाली और आपदा अभ्यास कराएं।

क्या आप गाँव या पहाड़ी इलाके में रहते हैं? अपने पड़ोसियों के साथ जल्द पलायन मार्ग और संपर्क सूची तय कर लें। समय पर प्रशासन को रिपोर्ट करने से बड़े नुकसान रोके जा सकते हैं।

संबंधित खबरें दैनिक दीया पर पढ़ें: "झारखंड में 17 जून को भारी बारिश का अलर्ट: नौ जिलों के लिए येलो अलर्ट" — यह जैसे लेख भूस्खलन की संभावनाओं से जुड़ी चेतावनी और स्थानीय तैयारियों की जानकारी देते हैं।

अगर आपको और विस्तृत निर्देश चाहिए—जैसे घर पर सुरक्षित करने के तकनीकी उपाय या स्थानीय खतरे का आकलन—तो अपने जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय से संपर्क करें और मौजूदा मानसून अलर्ट पर नजर रखें। सुरक्षित रहें और छोटे संकेतों को अनदेखा न करें।

वायनाड भूस्खलन में मृतकों की संख्या 100 के पार, अरब सागर के गरमाने से जुड़ा वैज्ञानिक ने दी चेतावनी 30 जुलाई 2024

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केरल के वायनाड में हाल के भूस्खलनों में मृतकों की संख्या 100 के पार हो गई है, और कई अभी भी लापता हैं। जलवायु वैज्ञानिक डॉ. एस. सजानी ने बताया कि यह आपदा अरब सागर के गरमाने से हुई है। उन्होंने चेताया कि अगर सही कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

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