छत्रपति शिवाजी महाराज महाराष्ट्र और भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। वे सिर्फ एक योद्धा नहीं थे—उनका काम प्रशासन, समुद्री रक्षा और किले निर्माण तक फैला हुआ था। क्या आप जानते हैं कि उनकी राज्य-निति और लोकप्रशासन आज भी अध्ययन का विषय हैं?
शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी किले में हुआ था। उन्होंने छोटी सेना और स्थानीय आबादी की मदद से बड़े शत्रुओं के खिलाफ निरंतर अभियान चलाए। उनकी खास रणनीति तीन बातों पर टिकी थी: गति, स्थानीय इलाके का ज्ञान और आश्चर्यजनक हमला। गोरिल्ला युद्ध (गुना-गुना) की तकनीकें उन्होंने माहिरी से अपनाईं।
किले उनकी ताकत थे। रायगढ़, सिंहगड, सिंधुदुर्ग और पुरंदर जैसे किले रणनीतिक रूप से चुने गए थे। क्या आप रायगढ़ जाकर देखना चाहेंगे? वहां से उनके साम्राज्य के विस्तार और प्रशासन की झलक मिलती है। शिवाजी ने समुद्री फौज भी बनाई ताकि तस्करी और समुद्री डाकुओं से सुरक्षा हो सके।
उनकी प्रशासनिक व्यवस्था भी खास थी। 'अष्टप्रधान' मंत्रिमंडल, कड़ाई से लागू कर व्यवस्था और भूमि कर का सुव्यवस्थित रिकॉर्ड—ये सब उनकी सरकार की नींव थे। शिवाजी ने धर्म और संस्कृति के मामलों में संतुलन रखा और स्थानीय राजाओं तथा किसानों का समर्थन जुटाया।
शिवाजी की विरासत आज भी जीवंत है। हर साल शिवाजी जयंती मनाई जाती है और स्कूलों में उनकी नीति से जुड़ी कहानियाँ पढ़ाई जाती हैं। उनकी जीवन-नीति पर कई किताबें और संग्रहालय उपलब्ध हैं। यदि आप गहराई से पढ़ना चाहते हैं तो 'शिवचरित्र' और आधुनिक इतिहासकारों के लेख पढ़ें।
यात्रा की योजना बनाते समय मौसम का ध्यान रखें। किले और म्यूजियम भेजने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है। रायगढ़ और सिंधुदुर्ग पहुंचना आसान है—मुम्बई से सड़क या ट्रेन से यात्रा कर सकते हैं। किले पर चढ़ाई आसान नहीं होती; आरामदायक जूते और पानी साथ रखें।
किस तरह से शुरू करें? यदि आप इतिहास में नए हैं, तो पहले एक संक्षिप्त जीवनी पढ़ें, फिर रायगढ़ का दौरा करें और अंत में स्थानीय संग्रहालय देखें। इससे कहानी और संदर्भ दोनों जीवंत हो उठेंगे।
शिवाजी महाराज की जीवनशैली और नीतियाँ आज के नेतृत्व और रणनीति के पाठ भी सिखाती हैं—दूरदर्शिता, लोक-हित और मजबूती। उनके नाम से जुड़े स्थान देखकर आप न केवल इतिहास देखेंगे, बल्कि उस समय की राजनीति और सभ्यता भी समझ पाएंगे।
अगर आप चाहें तो मैं आपको रायगढ़, शिवनेरी और सिंधुदुर्ग के लिए एक साफ ट्रैवल-इंटिनरी बना कर दे सकता/सकती हूँ—बस बताइए कब जाना है और कितने दिन का प्लान है।
19 फरवरी 2025 को महाराष्ट्र के राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन ने मुंबई के दादर स्थित शिवाजी महाराज मैदान में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस समारोह के साथ महाराष्ट्र में शिव जयंती उत्सव की शुरुआत हुई। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम और किले संरक्षण अभियान शामिल थे। न्यूयॉर्क में भी ऐसे कार्यक्रमों की घोषणाएं की गईं।