नीपा वायरस एक जिंदलता वाले जानलेवा वायरस में से है। इससे फेफड़े और दिमाग दोनों प्रभावित हो सकते हैं और मृत्यु दर कई घटनाओं में 40% से ऊपर रही है। यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्रूट बैट्स) से जुड़ा है, लेकिन व्यक्ति से व्यक्ति में भी फैल सकता है।
क्या लगेगा तो कैसे पहचानें? शुरुआत में सामान्य बुखार, सरदर्द और थकान होती है। कुछ मरीजों को उल्टी या गले में खराश भी हो सकती है। गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत, अचानक भ्रम, बेहोशी और दौरे (seizures) दिखते हैं — यह संकेत है कि मस्तिष्क प्रभावित हो रहा है (encephalitis)।
इन्क्यूबेशन पीरियड यानी संक्रमण से लक्षण दिखने तक का समय आमतौर पर 4-14 दिन होता है, पर कुछ मामलों में 21 दिन तक भी रिपोर्ट हुआ है। अगर किसी को तेज बुखार के साथ सांस या नर्वस सिस्टम के लक्षण दिखें और हाल‑ही में चमगादड़, सूअर या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
नीपा वायरस के फैलने के प्रमुख रास्ते ये हैं: संक्रमित चमगादड़ों का फल या फलों का रस (जैसे पाम सैप) पर गिरना, संक्रमित सूअरों के साथ निकट संपर्क, और संक्रमित व्यक्ति की श्वास/लिक्विड से सीधे नज़दीकी संपर्क। अस्पतालों में चिकित्सा कर्मचारी बिना उपयुक्त सुरक्षा के संक्रमित मरीजों के संपर्क में आ सकते हैं।
बचाव के व्यवहारिक तरीके सरल हैं: कच्चे फलों को अच्छे से धोएं, खुले में रखे फलों या रस से परहेज़ करें, चमगादड़ों के रहने वाले स्थानों के पास अपने जानवर न रखें और अगर कोई बीमार दिखे तो नजदीकी संपर्क सीमित रखें। स्वास्थ्यकर्मियों को PPE (मास्क, दस्ताने, गाउन) का इस्तेमाल करना चाहिए।
इलाज के बारे में जानना ज़रूरी है: अभी तक नीपा के लिए कोई किस्म का विशेष, व्यापक स्वीकृत इलाज या वैक्सीन आम उपयोग में नहीं है। उपचार सहायक (supportive) होता है — जैसे आईसीयू में देखभाल, तरल संतुलन, ऑक्सीज़न और लक्षणों का प्रबंधन। कुछ दवाओं पर शोध चल रहा है, पर वे व्यापक प्रमाणित नहीं हैं।
भारत में केरल राज्य में हुए पिछले मामलों से सीखा गया है कि जल्दी पहचान, तीव्र संपर्क‑खोज (contact tracing) और त्वरित आइसोलेशन प्रभावी होते हैं। यदि आपके क्षेत्र में कोई मामला आता है तो स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों की सलाह सुनें और निर्देशों का पालन करें।
अंत में, सतर्कता और सूचना सबसे बड़ा हथियार है। तेज बुखार के साथ सांस या नर्वस लक्षण दिखने पर देरी न करें — अस्पताल जाएँ और अपने संपर्कों की जानकारी स्वास्थ्य अधिकारियों को दें। छोटी‑सी सावधानी कई जीवन बचा सकती है।
केरल के मलप्पुरम जिले के वंडूर से एक 24 वर्षीय युवक की नीपा वायरस संक्रमण से मौत की पुष्टि की गई है। यह घटना 15 सितंबर, 2024 को हुई जब राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे से परीक्षण परिणाम प्राप्त हुए। युवक ने पेरिंथलमन्ना के एक निजी अस्पताल में 9 सितंबर को अंतिम सांस ली थी।