बचत खाते में पैसा रखने से रिटर्न कम मिलता है। अगर आप चाहते हैं कि पैसा समय के साथ बढ़े तो निवेश जरूरी है। पर कहां से शुरू करें? नीचे सीधी, काम की और प्रैक्टिकल सलाह दी गई है जिन्हें आप आज ही लागू कर सकते हैं।
सबसे पहले लक्ष्य तय करिए—घर, बच्चे की पढ़ाई, रिटायरमेंट या छोटी-सी फाइनेंशियल फ्रीडम। हर लक्ष्य का समय (हॉराइजन) और जरूरी राशि तय करें। इससे तय होगा कि आपको कितना जोखिम लेना है और कौन सा प्लान चुने।
1) आपातकालीन फंड बनाएं: कम से कम 3-6 महीने के खर्च के बराबर बचत रखें। ये बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट, लिक्विड फंड या सेविंग अकाउंट में रखा जा सकता है।
2) कर्ज का ऑडिट करें: हाई-इंटरेस्ट कर्ज (क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन) पहले चुकाएं। कर्ज होने पर निवेश का रिटर्न भी उस कर्ज के ब्याज से कम पढ़ सकता है।
3) जोखिम प्रोफ़ाइल जानें: क्या आप कॉन्शस रिटर्न चाहेंगे या सुरक्षा? युवा हो तो इक्विटी का हिस्सा ज्यादा रख सकते हैं; निकट लक्ष्य के लिए डेब्ट/फिक्स्ड विकल्प बेहतर हैं।
4) छोटे से शुरू करें: SIP से शुरू करना सबसे आसान तरीका है। 500-1000 रुपये प्रति माह से भी आप निवेश यात्रा शुरू कर सकते हैं। समय के साथ अमाउंट बढ़ाइए।
5) KYC और अकाउंट सेटअप: म्यूचुअल फंड के लिए KYC, डीमैट अकाउंट स्टॉक्स के लिए जरूरी है। आजकल सब ऑनलाइन हो जाता है—PAN, आधार और बैंक डीटेल्स से काम बन जाता है।
इक्विटी (स्टॉक्स/इंडेक्स फंड): लंबी अवधि के लिए 7-12% या उससे अधिक रिटर्न की संभावना। अगर आपका हॉराइजन 5+ साल है तो SIP से इंडेक्स/एल्गो म्यूचुअल फंड पर विचार करें।
डेब्ट (बॉन्ड, फिक्स्ड डिपॉज़िट, डेब्ट फंड): 1-5 साल के लक्ष्य और सुरक्षा के लिए।
ELSS/PPF/NPS: टैक्स बचाने के साथ लॉन्ग-टर्म बचत चाहिए तो ELSS (80C), PPF और NPS अच्छा विकल्प।
डायवर्सिफाई करें: एक ही जगह सब पैसा मत रखें। इक्विटी + डेब्ट + कुछ गोल्ड/अचल संपत्ति का मिश्रण रखें।
रिव्यु और रीबैलेंसिंग: साल में एक बार अपने अलॉकेशन की समीक्षा करें। यदि इक्विटी बहुत बढ़ गई तो हिस्से बेच कर लक्षित अलोकेशन पर लौटें।
निश्चय करें कि हर निवेश का कारण है। ट्रेंड देखकर जल्दी-जल्दी बदलना नुकसान दे सकता है। छोटे-छोटे कदम लगातार उठाइए—SIP चालू रखिए, सीखते जाइए और समय के साथ रणनीति सुधारिए।
अगर आप चाहें तो अपनी उम्र, लक्ष्य और जोखिम बताइए—मैं एक सादा अलोकेशन सुझाव दे सकता हूँ जो आपकी शुरुआत को आसान बना देगा।
अनुच्छेद 370 हटने के छह साल बाद जम्मू-कश्मीर में निवेश में उछाल, आईआईटी की स्थापना और पर्यटन के विस्तार जैसे बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। हालांकि विकास के दावों के बीच बेरोजगारी और राजनीतिक मांगें भी चुनौती बनी हुई हैं।