येलो अलर्ट का मतलब होता है कि मौसम सामान्य से अस्थिर हो सकता है और कुछ परेशानी पैदा हो सकती है। ये सबसे कम गंभीर चेतावनी होती है, पर इसका मतलब यह नहीं कि नजरअंदाज कर दें। उदाहरण के लिए तेज़ गर्मी, भारी बारिश या तेज़ हवाओं के पहले येलो अलर्ट जारी हो सकता है ताकि लोग तैयार रहें।
सरल भाषा में, येलो अलर्ट कहते हैं: "सावधान रहिए।" यह बताता है कि मौसम में बदलाव आ सकता है और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य दिनचर्या पर असर पड़ सकता है। येलो अलर्ट पर अधिकारी और मीडिया सामान्य सलाह देते हैं — बाहर निकलते समय सावधानी रखें, यात्रा की योजना पर ध्यान दें और जरूरत न हो तो जोखिम भरे इलाकों में न जाएँ।
दैनिक दीया जैसी खबरों में अक्सर मौसम अपडेट मिलते हैं। हाल ही में कानपुर में तापमान बढ़ने की रिपोर्ट में भी येलो अलर्ट जैसी चेतावनियाँ जानकारी के साथ दी गई थीं। ऐसे अलर्ट स्थानीय मौसम विभाग और सरकारी चैनलों से क्रॉस-चेक करें।
यूं तो येलो अलर्ट गंभीर नहीं होता, पर छोटे-छोटे कदम बहुत फर्क डालते हैं। नीचे सीधे और असरदार कदम दिए जा रहे हैं जिन्हें आप तुरंत अपना सकते हैं:
याद रखें, येलो अलर्ट पर त्रुटिपूर्ण अफवाह फैलाई जा सकती है। आधिकारिक स्रोत जैसे भारतीय मौसम विभाग (IMD) या राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र की जानकारी ही मानें। सोशल मीडिया पर साझा खबरें हमेशा सत्यापित कर लें।
अगर आप ताज़ा खबर चाहते हैं, तो दैनिक दीया पर मौसम और घटनाओं के अपडेट देखें — जैसे कानपुर में तापमान बढ़ने की रिपोर्ट या अन्य स्थानीय अलर्ट। अलर्ट मिलने पर छोटे-छोटे तैयार कदम आपके लिए और आपके परिवार के लिए बड़ा फर्क बना सकते हैं।
झारखंड में 17 जून को भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। IMD ने नौ जिलों के लिए येलो अलर्ट और आगे के दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस बार मानसून आमतौर पर समय से पहले 17-19 जून के बीच पहुंचेगा। लोगों को जलभराव और रोजमर्रा के जनजीवन में बाधा की आशंका जताई गई है।