देवशयनी एकादशी हिन्दू धर्म में एक खास दिन है जब भगवान विष्णु चातुर्मास के लिए योगी या निद्रालीन होते हैं। इसे कभी-कभी "आषाढ़ की एकादशी" भी कहा जाता है। यह व्रत धार्मिक आदर्शों और साधारण जीवनशैली बदलने का अच्छा मौका देता है। अगर आप इस बार व्रत रखना चाहते हैं तो यहाँ सरल और सीधे तरीके बताए जा रहे हैं।
सबसे पहले तारीख और समय की पुष्टि कर लें। एकादशी का फलना-काल और एकादशी का उपवास सूर्योदय से पहले प्रारम्भ होने से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक माना जाता है, पर सही आरंभ और समापन का समय पंडित या स्थानीय हिंदू कैलेंडर (पंचांग) से जरूर जाँच लें।
1) त्यौहार से एक दिन पहले हल्का शुद्ध भोजन लें और शराब, मांस, अंडे आदि त्याग दें। 2) व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें। 3) विष्णु या कृष्ण की मूर्ति/चित्र के सामने दीप जलाएँ। 4) विष्णु मंत्र (ॐ नमो नारायणाय) या श्री विष्णु सहस्रनाम जाप से दिन बिताएँ। 5) ज्यादा कठिन व्रत न कर रहे हों तो फल, दूध और एक्वा-जल से भी उपवास किया जा सकता है।
उपवास के दौरान ध्यान रखें: नमक और तेल का प्रयोग पारंपरिक नियमों में वर्जित माना जा सकता है, पर स्वास्थ्य कारणों से डॉक्टर की सलाह पर विशेष व्यवस्था करें। वृद्ध, रोगी या गर्भवती महिलाएँ व्रत के नियम अपने चिकित्सक और पंडित से मिलकर तय करें।
पूजा की सरल रूपरेखा: स्थान साफ करें, चौमासा (चैती) या किसी साफ कपड़े पर भगवान की तस्वीर रखें, धूप-दीप और नैवेद्य चढ़ाएँ। फिर 11 या 108 बार ‘‘ॐ नमो नारायणाय’’ का जप करें। आप श्रीविष्णु सहस्रनाम पढ़ना चाहें तो वह और भी पुण्य बढ़ाता है। पूजा के बाद गरीबों में भोजन या अनाज दान करने से बड़ा धर्म माना जाता है।
व्रत के फायदे: मन को शांति मिलती है, अनुशासन आता है और आध्यात्मिक फोकस बढ़ता है। सामाजिक रूप से यह परिवार और समुदाय में एक साथ बैठकर भक्ति का एहसास जगाता है।
किसने व्रत रखा: सामान्यतः जो लोग भक्ति और नियम से जुड़ना चाहते हैं वे व्रत रखते हैं। यदि आप पहली बार रख रहे हैं तो अनुभवी किसी धार्मिक व्यक्ति या पंडित से मार्गदर्शन लें।
कई लोग एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते की आराधना भी करते हैं और घर में साफ-सफाई व दान का विशेष ध्यान रखते हैं। अगर आपको पूजा सामग्री चाहिए तो तुलसी, दीपक, धूप, फल और ठहराव वाला एक हल्का ब्राह्मी या नारियल पर्याप्त रहेगा।
अंत में एक बात याद रखें: व्रत का असली मकसद भक्ति और आत्मशुद्धि है, इसलिए दिखावा नहीं बल्कि सच्ची नीयत रखें। यदि आप व्रत नहीं रख पाते तो भी पूजा, दान और मन की शुद्धि से पुण्य मिलता है।
देवशयनी एकादशी 2024 में 17 जुलाई को मनाई जाएगी। यह एकादशी वह दिन है जब भगवान विष्णु योग निद्रा में जाते हैं और चार महीने तक शुभ कार्य जैसे विवाह और नए उपक्रम अवरुद्ध रहते हैं। भक्तगण इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। व्रत का पारण 18 जुलाई को सुबह 5:34 से 8:19 बजे के बीच होगा।