फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) — सरल भाषा में समझें

एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) नाम सुनने में अच्छा लगता है — कम टैक्स, सस्ते सामान और बढ़ा व्यापार। पर क्या हर बार फायदा ही होता है? नहीं। एक समझौता आपकी खरीद सस्ता कर सकता है, लेकिन कुछ सेक्टरों को कठिनाइयाँ भी दे सकता है।

सीधे शब्दों में: FTA दो या अधिक देशों के बीच ऐसा समझौता है जिसमें सीमित या निल टैक्स पर कुछ उत्पाद और सेवाएँ एक-दूसरे के बीच बिना ज्यादा रुकावट के बेंची और खरीदी जा सकती हैं। इसका मकसद व्यापार बढ़ाना और सीमा शुल्क घटाना होता है।

फायदे और नुकसान — जिससे आप सीधा समझ सकें

फायदे आसान हैं: आयात की कीमत घटती है, घरेलू उद्योग सस्ते इनपुट पा सकते हैं, एक्सपोर्टर नए बाजार खोल पाते हैं और ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलते हैं। उदाहरण के लिए, भारत‑UAE CEPA जैसे समझौते ने कुछ सेक्टरों को नई बाजार पहुँच दी है।

पर नुकसान भी होते हैं: स्थानीय किसानों और छोटे निर्माता पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि सस्ते आयात उनकी बिक्री छीन लेते हैं। कुछ मामलों में रोजगार और मांग प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि भारत ने RCEP में शामिल होने से पहले कई चिंताओं का हवाला दिया।

व्यवसाय और उपभोक्ता के लिए व्यावहारिक बातें

अगर आप व्यापारी हैं तो कुछ सीधी बातें करना ज़रूरी है: पहले अपने उत्पाद का HS कोड जानें; फिर यह देखें कि किस FTA में आपकी वस्तु के लिए विशेष टैरिफ लाभ मिलते हैं। लाभ पाने के लिए 'Certificate of Origin' चाहिए होता है — इसे न भूलें।

छोटे व्यापारियों के लिए टिप्स: 1) सरकार की ट्रेड पोर्टल्स पर FTAs की सूची और टैरिफ शेड्यूल देखें; 2) नियम ऑफ ओरिजिन और क्वोटा समझें; 3) लॉजिस्टिक्स और सर्विस कॉस्ट का हिसाब लगाएं — कभी-कभी टैक्स बचत शिपिंग से कम हो जाती है।

उपभोक्ता के रूप में क्या ध्यान रखें? कोई भी सामान अचानक बहुत सस्ता दिखे तो सोचें कि वह स्थानीय उद्योग पर क्या असर डालेगा। खाने‑पीने और कृषि उत्पादों में आयात बढ़ने से छोटे किसानों की आय घट सकती है।

नीति‑निर्माता कैसे सोचते हैं? वे संतुलन चाहते हैं — बाजार खोलना है लेकिन घरेलू सेक्टरों को सुरक्षा भी देनी है। इसी संतुलन के लिए अस्थायी टैरिफ, सुरक्षा क्लॉज़ और संवेदनशील सूचियाँ रखी जाती हैं।

अंत में, FTA कोई जादू की छड़ी नहीं है। यह अवसर और जोखिम दोनों देता है। अगर आप व्यापारी हैं तो दस्तावेज़ सही रखें, सरकार की सूचनाओं पर नजर रखें और मार्केट‑स्ट्रैटजी उसी के अनुसार बदलें। उपभोक्ता के तौर पर समझदारी से खरीदें और स्थानीय उत्पादों पर भी नजर रखें।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर और सवाल हैं? आप किस सेक्टर के बारे में जानना चाहते हैं — कृषि, टेक्सटाइल, ऑटो या सेवाएँ? बताइए, मैं सरल तरीके से मदद कर दूँगा।

भारत-UK FTA: टैरिफ घटने से व्यापार और संबंध दोनों मजबूत होंगे 7 मई 2025

भारत-UK FTA: टैरिफ घटने से व्यापार और संबंध दोनों मजबूत होंगे

भारत और यूके ने मई 2025 में ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल किया, जिससे 90% सामानों पर टैरिफ खत्म हुए। समझौते से पेशेवरों के लिए सोशल सिक्योरिटी में छूट मिली और द्विपक्षीय व्यापार £25.5 अरब तक पहुंचने की उम्मीद है। भारतीय एक्सपोर्ट भी अब UK में आसानी से पहुंच पाएंगे।

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